परमानंद

मेरे बच्चे अगर किसी दिन नाराज़ होकर कह दे। मुझे भूख नही है मैं नही खाता। तो शायद मेरा बी पी हाई हो जाय या मैं भी भोजन को देख हिचकिचाहट महसूस करू। लेकिन मुझे इस बात की ख़बर भी नही रहती की मेरे पड़ोसी ने खाना बनाया भी है या नही। भोजन तो खैर सभी बंद दरवाजों के पीछे ही करना पसंद करते है।
इन्हें इंगित करने का मेरा उद्देश्य सिर्फ इतना ही है कि अगर इस दुनिया मे एक भी इंसान क्या जानवर भी भूखा है कहीं तो हमारा खाना हराम है। अरे बाप रे तब विकट परिस्थिति खरी हो जायेगी। 
नही। यह करुणा का आधार है। क्या हमें अहसास है। कोई कंही भूखा तो नही।हे ईस्वर ऐसा नही होना चाहिए। मैं दो रोटी कम खा लूँगा। तू भूखा जगाता जरूर है पर किसी को भूखा सुलाता नही। यह श्रद्धा है। उस महान ऊर्जा के प्रति जिसने हम सबकी रचना की ऐसा मानना ही भक्ति है। और भक्ति ही हमे इस पीड़ा में भी आनंद दे सकता है ऐसी स्थिति हमेशा आपके जीवन मे बनी रहे तो परमानंद है।

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